Soul - A Super Computer
!! Soul - A Super Computer !!
!! आत्मा एक सुपर कम्प्यूटर !!
आज तक बने सभी कम्पयूटरों में मानव मस्तिष्क सबसे बढिया व जटिल कम्पयूटर है। कम्पयूटर की भाषा में तुलना करें तो हमारा शरीर एक हार्डवेयर है। शरीर ठीक वैसा है जैसे कि कम्पयूटर की बाहरी बॉडी अर्थात बाहरी ढाँचा, कम्पयूटर में जिस तरह साफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, वैसे ही हमारे शरीर के भीतर मन-बुद्धि कार्य करते हैं और आत्मा आपरेशनल साफ्टवेयर [Operating System] है। यदि आपरेशनल साफ्टवेयर ना हो, तो कम्पयूटर मृत-समान है। वैसे ही आत्मा के ना होने पर शरीर जीवित नहीं रह सकता।
आज तक बने सभी कम्पयूटरों में मानव मस्तिष्क सबसे बढिया व जटिल कम्पयूटर है। कम्पयूटर की भाषा में तुलना करें तो हमारा शरीर एक हार्डवेयर है। शरीर ठीक वैसा है जैसे कि कम्पयूटर की बाहरी बॉडी अर्थात बाहरी ढाँचा, कम्पयूटर में जिस तरह साफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, वैसे ही हमारे शरीर के भीतर मन-बुद्धि कार्य करते हैं और आत्मा आपरेशनल साफ्टवेयर [Operating System] है। यदि आपरेशनल साफ्टवेयर ना हो, तो कम्पयूटर मृत-समान है। वैसे ही आत्मा के ना होने पर शरीर जीवित नहीं रह सकता।
भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने आत्मा की जो व्याख्या की है, ठीक उसी प्रकार कम्पयूटर के साफ्टवेयर को भी कोई मार नहीं सकता है। जल द्वारा उसे भिगोया नहीं जा सकता, आग उसे जला नहीं सकती, हवा उसे सुखा नहीं सकती और कोई भी हथियार नष्ट नहीं कर सकता। आदि शंकराचार्य ने भजगोविंद्म में कहा है कि शरीर की मृत्यु के पश्चात यदि पत्नी भी पति के मृत शरीर को छुए, तो वो स्नान करती है।
शरीर के अंदर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के हिस्से हैं - मन बुद्धि व अहंकार, जिनमें कि पुन:प्राप्त किया जा सकने वाला डाटा या तो स्थिर चित्र या फिर चलचित्र के रूप में उपस्थित रहता है, ये डाटा [आधार सामग्री] समय के अनुसार बदलता रहता है, और इसे अपडेट भी किया जा सकता है। पूरे जीवनकाल की सभी क्रियाओं की जानकारी किसी भी समय इस डाटा के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।
ये मानव शरीर रूपी कम्पयूटर एक लोकल सर्वर की भांति है, जो कि अन्य शरीरों के लोकल सर्वर से जुडा रहता है और ये सभी लोकल सर्वर बहृमांड के मास्टर सर्वर,जिसे हम परमात्मा कहते हैं, उससे जुडे रहते हैं।
कम्पयूटर के क्षेत्र में फैले वेब जाल से जिस प्रकार हम कहीं से भी, कोई भी जानकारी किसी भी वक्त प्राप्त कर सकते हैं, दूर बैठे लोगों से संबंध स्थापित कर अपनी जानकारी भेज सकते हैं, मास्टर सर्वरसे जुड सकते हैं, ठीक वैसे ही मानव-शरीरों के बीच भी यह सब संभव है।
वैदिक काल में ऋषि-मुनि सभी कुछ जान सकते थे, जैसा कि आज हम कम्पयूटरकी भाषा में जान पा रहे हैं। वे किसी भी व्यक्ति की मन:स्थिति, उसका भूत और भविष्य जान लेते थे।
प्रतिपल हमारा कार्य, विचार व बातें मास्टर सर्वरमें सकंलित होती रहती हैं, इसीलिए मास्टर सर्वर के पास हमारे भूत और वर्तमान की सभी जानकारियां उपलब्ध रहती हैं। हमारा वर्तमान हमारे भूतकाल में किए गए कर्माें पर और हमारा भविष्य हमारे वर्तमान पर आधारित रहता है। कुरान में वार्णित है कि मनुष्य के सभी कर्मों का ब्यौरा ईश्वर के पास संकलित रहता है।
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